दिल्ली में प्रचंड बहुमत से सत्ता हासिल करने के बाद गोवा और पंजाब में शिकस्त खा चुकी आम आदमी पार्टी (आप) पहली बार गुजरात के चुनाव में उतरी तो जीत तो दूर मतगणना के दौरान रुझानों में भी कहीं नजर नहीं आईं।

33 सीटों पर आप के टिकट से प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा, अधिकांश सीटों पर जमानत जब्त हो गई। गुजरात में बहुमत हासिल करने वाली भाजपा को कुल मतों का 49 फीसद मिला तो वहीं आम आदमी पार्टी को महज 0.1 फीसद (28,905 मत) वोट मिला।

आप के लिए यह चुनाव इसलिए अहम हो गया था क्योंकि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद राज्य का यह पहला विधानसभा चुनाव था। आप के शीर्ष पदों पर काबिज नेता केंद्र सरकार की नीतियों की लगातार आलोचना करते रहे और चुनाव में उम्मीद लगाए बैठे थे इससे पार्टी की सेहत पर फर्क पड़ेगा। लेकिन वैसा कुछ नहीं हुआ।

गुजरात चुनाव में कई दिलचस्प चीजें भी देखने को मिली है। यहां पर भाजपा और कांग्रेस के बीच चली कांटे की टक्कर से इतर कई और पार्टियां अपनी किस्मत आजमाने के लिए गुजरात के रण में उतरी थी। आप उन्हीं में से एक थी।

यहां की ऊंझा सीट पर रमेशभाई पटेल को चुनाव लड़ाया था, लेकिन वो सफल नहीं हो पाए। वे आठवें नंबर पर रहे और चार सौ वोट का आंकड़ा भी नहीं छू पाए। इसी तरह बापूनगर की सीट पर आप ने अनिल वर्मा को टिकट दिया।

वे सिर्फ 1167 वोटों पर सिमट गए। यहां उनके सामने भाजपा के जगरूप सिंह राजपूत और कांग्रेस के हिम्मत सिंह पटेल थे। बापूनगर सीट पर भी आप का प्रदर्शन काफी उत्साहवर्धक नहीं रहा।

गोंडल विधानसभा सीट की बात करें तो यहां पर आप प्रत्याशी निमिषा बेन धीरजलाल थीं। लेकिन, उन्हें महज 2179 वोट ही मिल पाए, जबकि इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले भाजपा उम्मीदवार को 70 हजार से ज्यादा वोट मिले।

इसी तरह अगर बाकी विधानसभा सीटों पर नजर डाले तो लाठी विधानसभा सीट एमडी मांजरिया 797 वोट मिले तो वहीं छोटा उदयपुर में आप के अर्जुन भाई वेरसिंग भाई राठवा के पक्ष में सिर्फ 4515 वोट पड़े।

इसी तरह, पारडी में डा. राजीव शंभुनाथ पांडे के खाते में 539 वोट पड़े। कामरेज में भी आप का प्रदर्शन नाराशाजनक नहीं रहा। कामरेज में रामभाई धडुक को 1454 वोट मिले और वो तीसरे नंबर पर रहे तो वहीं गांधीनगर उत्तर में पटेल गुणवंत कुमार केशवलाल को 348 वोट मिले।

बोटाद में जीलुभाई मीठाभाई को 303 वोट मिले और 15वें नंबर पर रहे जबकि राजकोट पूर्व में अजीत घुसाभाई लोखील को 1868 वोट मिले और वो चौथे नंबर पर रहे और सूरत पूर्व में सलीम अकबरभाई मुलतानी को 265 वोट मिले।

चुनाव नतीजे आने के बाद दिल्ली में बैठे आप नेताओं के बोल भी बदलने लगे। आप नेता संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, अलका लांबा आदि ने एक बार फिर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की बात कह भाजपा के जीत के जश्न को कम करने की कोशिश की।

वहीं, आप नेता कुमार विश्वास ने मतदान और मतगणना में किसी तरह की गड़बड़ी की बात को नकारते हुए भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी को जीत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज का चुनाव परिणाम का एक सबक यह भी है कि भारतीय राजनीति में सड़क पर उतर कर संवाद-संघर्ष का समय लौट रहा है।

‘चरण-पादुका’ व ‘चौकड़ी’ राजनीति का समय ढल रहा है। संवाद के महारथियों के लिए ये मैदान मुफीद है जबकि अंतपुर के शकुनियों के लिए नव-भारत का वोटर द्वार बंद कर रहा है।

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