नई दिल्ली, । भारतीय टीम में अगर ऑलराउंडरों की बात करें तो हमेशा ऐसी छवि सामने आती है कि एक ऐसा बल्लेबाज जो वनडे व टी-20 में बीच के कुछ ओवरों में स्पिन गेंदबाजी करके बाकी गेंदबाजों का बोझ कम करता हो या टेस्ट में चार गेंदबाज खेलने की स्थिति में दिन में 10-15 ओवर फेंककर तेज गेंदबाजों को थकान मिटाने का मौका देता हो। अगर कपिल देव को छोड़ दें तो भारतीय टीम के पास ऐसा कोई बड़ा ऑलराउंडर नहीं आया जो टेस्ट में तेज गेंदबाजी के साथ छठे या सातवें नंबर पर बढ़िया बल्लेबाज की भूमिका निभा सकता हो। बीच में मनोज प्रभाकर और सौरव गांगुली ने कुछ कोशिश की, लेकिन उन्हें तेज गेंदबाज ऑलराउंडर के तौर पर सफलता नहीं मिली। अब हार्दिक पांड्या में ऐसे सशक्त ऑलराउंडर की छवि देखी जा रही है। उन्होंने खुद को साबित भी किया और यही कारण है कि उनसे उम्मीदें बढ़ गईं हैं। दक्षिण अफ्रीका पहुंच चुकी भारतीय टीम को पांच जनवरी से मेजबानों के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेलना है और वहां की कंडीशन के हिसाब से पांड्या एक्स फैक्टर साबित हो सकते हैं।

भारत को हमेशा से ही तेज गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर की कमी खली। भारत के पास ऐसे विकल्प जरूर मौजूद रहे जो ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी के साथ स्पिन गेंदबाजी कर सकते हों या स्पिन गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में बल्लेबाजी कर सकते हों। चाहे वीरेंद्र सहवाग हों या युवराज सिंह, रविचंद्रन अश्विन हो या रवींद्र जडेजा, इन लोगों ने भारतीय उपमहाद्वीप पर अच्छा योगदान दिया है, लेकिन विदेशी पिचों खासकर दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड में ये उतने कारगर साबित नहीं हुए। अब पांड्या में ऐसा दमखम नजर आ रहा है कि वह टेस्ट में एक दिन में 20 से 30 ओवर फेंक सकते हैं और उन्हें कुछ विकेट मिल सकते हैं।

क्यों हैं पांड्या महत्वपूर्ण

अगर भारत के पिछले छह दक्षिण अफ्रीकी दौरों की बात की जाए तो उसमें तेज गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी करने वाले एक ही भारतीय ऑलराउंडर का नाम याद आता है और वह है कपिल देव। 1992-93 में भारत ने पहली बार दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया था और उस समय कपिल अपनी आखिरी पारी खेल रहे थे। भारत के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर ने उस दौरे में चार टेस्ट मैचों में आठ विकेट लेने के साथ 202 रन बनाए थे। मनोज प्रभाकर ने भी इस दौरे पर इतने ही मैचों में नौ विकेट के साथ 112 रन बनाए थे। हालांकि, भारत वह टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाया था। अब पांड्या में कपिल की छवि देखी जा रही है। पांड्या 32 वनडे में 602 रनों के साथ 35 विकेट, तो 27 टी-20 में 154 रनों के साथ 23 विकेट ले चुके हैं। जनवरी 2016 में टी-20 से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रवेश करने वाले पांड्या ने अब तक तीन टेस्ट मैच खेले हैं। उन्हें पिछले दो साल में टेस्ट टीम में मौका नहीं मिला, क्योंकि भारत इस दौरान ज्यादातर टेस्ट क्रिकेट भारतीय उपमहाद्वीप में खेला, लेकिन 2018 में भारत को अधिकतर टेस्ट देश से बाहर खेलने हैं। ऐसे में तेज पिचों पर रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा से ज्यादा पांड्या को मौका मिल सकता है।

कोहली को है विश्वास

पांड्या ने अब तक खेले तीन टेस्ट मैचों में 178 रन बनाने के साथ चार विकेट लिए हैं। उन्होंने यह तीनों टेस्ट श्रीलंका के खिलाफ पिछले साल उसी के घर में खेले थे। तीन मैचों में उन्हें सिर्फ 32 ओवर ही करने को मिले, लेकिन दक्षिण अफ्रीका में वह चौथे तेज गेंदबाज और छठे नंबर के बल्लेबाज की भूमिका निभा सकते हैं। वह तीन टेस्ट में ही एक शतक और एक अर्धशतक जड़ चुके हैं। उनके रहने से कोहली के अंतिम एकादश में पांच बल्लेबाज, एक विकेटकीपर, एक ऑलराउंडर और चार गेंदबाज हो जाएंगे। ऐसे में नंबर वन भारतीय टीम के पास सात नंबर तक बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी होंगे, जबकि पांच मुख्य गेंदबाज। इस स्थिति में कोहली तीन तेज गेंदबाजों के अलावा एक स्पिनर को भी अंतिम एकादश में जगह दे पाएंगे।

अफ्रीका को खलेगी कैलिस की कमी

अगर दक्षिण अफ्रीका की बात करें तो उसके पास पहले लांस क्लूजनर और उसके बाद लंबे अरसे तक जैक्स कैलिस तेज गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर की भूमिका निभाते रहे। हालांकि, भारत के खिलाफ सीरीज के लिए दक्षिण अफ्रीकी टीम में ऑलराउंडर के रूप में क्रिस मौरिस को शामिल किया गया है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि कैलिस विश्व के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर थे। अगर दक्षिण अफ्रीका ने विश्व क्रिकेट में नाम कमाया है तो उसमें कैलिस का बहुत बड़ा योगदान रहा।

कैलिस ने 166 टेस्ट मैचों में 13289 रनों के साथ 292 विकेट लिए हैं। उनका बल्लेबाजी में 45.97 का औसत है तो गेंदबाजी में 32.65 का औसत है। कैलिस ने 328 वनडे में 11579 रनों के साथ 273 विकेट लिए हैं। 2014 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले कैलिस की कमी दक्षिण अफ्रीका को अभी तक खल रही है। कैलिस के होने से उनका टीम संयोजन काफी मजबूत हो जाता था। वहीं, मौरिस की बात की जाए तो उन्होंने अब तक चार टेस्ट खेले हैं, जिनमें 24.71 की औसत से एक अर्धशतक के साथ 173 रन बनाए हैं, जबकि 38.25 की औसत से 12 विकेट झटके हैं। ऐसे में दक्षिण अफ्रीकी टीम मौरिस से वैसे ही प्रदर्शन की उम्मीद करेगी जैसा उसके लिए कई वर्षो तक कैलिस ने किया।

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