लखनऊ । सरकार ने किसानों का कर्ज माफ कर बेशक भाजपा के चुनावी वायदे को पूरा किया, लेकिन रिक्त सरकारी पदों पर भर्ती शुरू करने की चुनौती बनी हुई है। सूबे में भाजपा सरकार बनने के नौ माह बीतने को हैं मगर भर्ती प्रक्रिया को अपेक्षित रफ्तार नहीं मिल सकी। अब सामने 2019 का लोकसभा चुनाव होने के नाते सरकार पर भर्ती का दबाव है। संकेत हैं कि नए वर्ष में सरकार बंपर भर्ती करेगी।

लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने उप्र की 80 सीटें जीतने का संकल्प लिया है। सरकार और संगठन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब जनता की कसौटी पर खरे उतरने के उपक्रम में जुटे हैं। सरकारी महकमों में पुलिस समेत दो लाख से ज्यादा रिक्त पद हैं। मुख्य सचिव राजीव कुमार ने कई माह पहले से ही विभागों में भर्ती के लिए घंटी बजा दी है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने सपा सरकार में हुई भर्तियों के घोटाले को मुद्दा बनाया।

उप्र लोकसेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के भ्रष्टाचार को लेकर आक्रामक हुई भाजपा का यह वादा था कि सरकार बनने के 90 दिनों के भीतर पारदर्शी तरीके से भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। सरकारी प्रवक्ता की दलील है कि पिछली सरकार की भर्तियों का मामला अदालत में लंबित होने की वजह से ही देरी हो रही है। अभी तक पुलिस महकमे में ही 2011 की दारोगा और 2013 की पुलिस आरक्षी और समकक्ष पदों की भर्ती प्रक्रिया कायदे-कानून में फंसी है।

योगी सरकार ने पुलिस की भर्तियों के लिए नई नियमावली बना दी है और भर्ती के लिए नए सिरे से पहल होने जा रही है। केवल मंडी परिषद में ही समूह ग और ख के 1200 पदों पर भर्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षकों से लेकर ज्यादातर सरकारी विभागों में भर्ती होनी है।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन जल्द
पुलिस महकमे से लेकर विभिन्न सरकारी विभागों में दो लाख से ज्यादा पद रिक्त हैं। प्रदेश भर के विभागों में रिक्त पदों का ब्योरा तैयार हो गया है। इसके लिए मुख्य सचिव राजीव कुमार ने तेजी दिखाई। बार-बार दबाव बनाकर विभागों में रिक्त पदों का ब्योरा तैयार कराया और उसका ब्योरा संबंधित आयोगों को भेजने के निर्देश दिए। समूह ख और ग में ही करीब 65 हजार रिक्त पर चिह्नित किये गये हैं। समूह ग के पदों की भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के जरिये होनी है। मुख्य सचिव का कहना है कि अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के गठन की औपचारिकता करीब-करीब पूरी हो गई है।

आरक्षित पदों को भरने में भी आएगी तेजी
पुलिस में रिक्त सभी आरक्षित पदों को एक वर्ष के भीतर भरने के लिए भाजपा ने वादा किया था। इस अभियान में भी अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है। करीब डेढ़ लाख पद पुलिस महकमे में रिक्त हैं। वादा यह भी था कि संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था का सम्मान करते हुए मेरिट के आधार पर भर्ती शुरू की जाएगी। अब लोगों की निगाहें सरकार की ओर लगी हैं

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