नई दिल्ली। अमेरिका के साथ विभिन्‍न देशों के संबंधों में लगातार गिरावट आती दिखाई दे रही है। एक तरफ जहां ईरान के मुद्दे पर फ्रांस, चीन और रूस ने उसको ठेंगा दिखा दिया है तो वहीं मदद रोकने के मुद्दे पर पाकिस्‍तान ने भी अमेरिका को दगाबाज करार दे दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच तीखी बयानबाजी की जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि अमेरिका की तरफ से बार-बार ईरान को केंद्र में रखकर बयानबाजी की जा रही है। इस बार यह बयानबाजी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बुलाई आपात बैठक में की गई है। हालांकि यहां पर एक और चीज भी होती दिखाई दी। वह था अमेरिका के खिलाफ फ्रांस,रूस और चीन का कड़ा रुख। दरअसल, ईरान के मुद्दे पर जहां अमेरिका आक्रामक रुख इख्तियार करता दिखाई दे रहा था वहीं रूस फ्रांस और चीन ने ईरान के पक्ष में झंडा बुलंद कर दिया। इस बैठक में रूसी प्रतिनिधि वैसिली ए नेबेंजिया ने यहां तक कह दिया कि ईरान के मुद्दे पर अमेरिका सुरक्षा परिषद के मंच का दुरुपयोग कर रहा है। चीन के प्रतिनिधि वू हाइतो ने कहा कि सुरक्षा परिषद किसी देश के मानवाधिकारों पर चर्चा करने का स्थान नहीं है।
इस बैठक में शामिल फ्रांस के प्रतिनिधि केवी ओस्‍टरोम का कहना था कि उनके देश को उम्‍मीद है कि ईरान अपने यहां पर हिंसा को रोकने के लिए सही कदम उठाएगा और मानवाधिकार का हनन नहीं होने देगा। इसके अलावा उन्‍होंने यह भी कहा कि ईरान लोगों की शंकाओं को दूर करने के लिए उचित कदम उठाएगा। फ्रांस के प्रतिनिधि का यह बयान इसलिए भी खासा मायने रखता है क्‍योंकि साल की शुरुआत में जब ईरान में विरोध प्रदर्शन चल रहा था उसी दौरान फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमेन्‍युअल मैक्रॉन ने ईरानी राष्‍ट्रपति हसन रुहानी से मुलाकात की थी। यूएनएससी की इस बैठक के बाद ईरान के प्रतिनिधि ने ट्वीट कर कहा कि अमेरिकी सरकार ईरान में विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रही है।
सीरिया के वरिष्‍ठ पत्रकार वईल अवाद भी इस बात से पूरी तरह से इत्‍तफाक रखते हैं। उनका भी कहना है कि अमेरिका सोशल मीडिया के प्रभाव से ईरान में अस्थिरता बढ़ा रहा है। उनका यह बयान इस लिए भी बेहद खास है क्‍योंकि अमेरिका बार-बार ईरान में बंद हुए मोबाइल एप समेत दूसरी चीजों को शुरू करने की सिफारिश करता रहा है। रूस के विदेश मंत्री सर्गी रियाबकोव का भी कहना है कि अमेरिका यह सब केवल ईरान पर न्‍यूक्लियर डील में बदलाव के लिए दबाव के लिए कर रहा है। उनका यह भी कहना था कि उनकी निगाह में इस संधि में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। उन्‍होंने यह बयान अमेरिकी रक्षा मंत्री के उस बयान के बाद दिया है जिसमें उन्‍होंने कहा था कि ईरान को देखकर अमेरिका चुप नहीं रह सकता है। यूएनएससी की बैठक में अमेरिका की तरफ से कहा गया कि ईरान जो कर रहा है उसे दुनिया देख रही है।
बैठक में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थायी प्रतिनिधि निक्की हैले ने कहा, ईरान के लोग अब सड़कों पर उतर रहे हैं। वे मानवाधिकार और मौलिक आजादी की मांग कर रहे हैं, जिनसे कोई सरकार कानूनन इंकार नहीं कर सकती। वे मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं। अगर इस संस्था के मूल सिद्धांत कुछ मायने रखते हैं तो हम सिर्फ उनका क्रंदन नहीं सुनेंगे, बल्कि उनका जवाब देंगे। हैले ने कहा, संयुक्त राष्ट्र का हर सदस्य देश संप्रभु है। पर वे संप्रभुता की आड़ में अपने लोगों को मानवाधिकार व मौलिक आजादी से इनकार नहीं कर सकते। ईरान सरकार की करतूत दुनिया देख रही है। मैं अपील करती हूं कि वे जनता की आवाज को दबाने पर लगाम लगाएं और इंटरनेट तक लोगों की पहुंच बहाल करे, क्योंकि ईरानी लोग ही अपनी किस्मत तय करेंगे। गौरतलब है कि ईरान में एक सप्ताह से अधिक समय से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में 21 लोगों की मौत हो चुकी है। यह बैठक ईरान की ताजा स्थिति पर चर्चा के लिए अमेरिका के अनुरोध पर न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बुलाई गई थी। इसमें सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य देश जुटे थे।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अमेरिका का इस्लामाबाद के प्रति व्यवहार दगाबाज दोस्त का रहा है। अमेरिका के सुरक्षा सहायता रोकने को लेकर आसिफ ने एक साक्षात्कार में कहा, अमेरिका का रवैया कभी भी सहयोगी या दोस्त का नहीं रहा। अमेरिका हमेशा दगाबाज दोस्त रहा। इतना ही नहीं राजधानी इस्लामाबाद और लाहौर के पूर्वी इलाकों में शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद छात्रों के कुछ समूहों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ नारेबाजी की और उनके फोटो तथा अमेरिकी झंडे भी जलाए थे। पाकिस्तान के कई अन्य नेताओं ने भी अमेरिका की तीखी आलोचना की। विपक्ष के नेता इमरान खान ने तो अमेरिका से संबंध विच्छेद करने और प्रतिशोध की अपील करते हुए कहा, ट्रंप का ट्वीट और अन्य अमेरिकी टिप्पणियां पाकिस्तान को जानबूझ कर नीचा दिखाने और अपमानित करने के प्रयासों का हिस्सा थे।

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