नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क) पिछले साढ़े तीन साल अर्थव्यवस्था में सुधार के कड़े कदम उठाने के बाद अब केंद्र सरकार का फोकस बदल सकता है। 2019 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार अब रोजगार के अवसर पैदा करने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता में रखेगी। साथ ही अन्य सामाजिक क्षेत्रों में अतिरिक्त आवंटन भी देखने को मिल सकता है। वैश्विक वित्तीय सेवा फर्म ड्यूश बैंक की रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब सरकार ऐसी नीतियों पर ध्यान देगी, जिससे विकास दर बढ़े और नए अवसर पैदा हों। इसके मुताबिक, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद अब सरकार की प्राथमिकता नीतिगत सुधारों से हटकर कुछ विशेष नीतिगत पहल की ओर हो सकती है। इनमें मुख्य रूप से विकास दर बढ़ाने, रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने जैसे कदम शामिल रहेंगे। पिछले कुछ साल में ग्रामीण आय में वृद्धि नरम रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की खरीद क्षमता भी कम हुई है। ऐसे में सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में कुछ घोषणाएं कर सकती है। रिपोर्ट में रबी की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में सात फीसद की बढ़ोतरी की घोषणा का उदाहरण भी दिया गया है।

वित्तीय फर्म ने आगे इस तरह की और भी घोषणाओं की उम्मीद जताई है। ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा के लिए अतिरिक्त आवंटन, सीधे खाते में सब्सिडी भेजने व कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में और भी कदम उठाए जा सकते हैं। सरकार सस्ते मकान मुहैया कराने की योजना पर भी जोर देगी। रोजगार सृजन पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। इस क्षेत्र को तेजी देने के लिए कुछ नीतिगत कदम भी उठाए जा सकते हैं।

सरकार फरवरी में मौजूदा कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश करने जा रही है। ऐसे में विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में आवंटन बढ़ाया जा सकता है। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, श्रम, ऊर्जा, एमएसएमई और महिला एवं बाल कल्याण जैसे मंत्रलयों को बजट में प्राथमिकता मिलती रहेगी। सत्ता में आने के बाद से अर्थव्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार पर लगाम के उद्देश्य से सरकार कई बड़ी पहल कर चुकी है। नवंबर, 2016 में हुई नोटबंदी, पिछले साल जुलाई में जीएसटी लागू करना, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) लागू करने जैसे कदम इसी का हिस्सा रहे।

राजकोषीय घाटे पर रुख होगा नरम
रेटिंग एजेंसी इकरा के प्रमुख नरेश ठक्कर ने बजट में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर थोड़ा नरमी की संभावना जताई है। ठक्कर का कहना है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में जिस तरह से भाजपा को मुश्किल जीत मिली है, उससे सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव आएगा। उन्होंने कहा, ‘गुजरात नतीजे आश्चर्यजनक रूप से मुश्किल भरे रहे। इसका असर नीतियों पर दिखेगा। अगले लोकसभा चुनाव के लिए अब केवल 18 महीने बचे हैं। अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध सरकार अब प्राथमिकताओं को थोड़ा बदलेगी। ग्रामीण क्षेत्र और लघु उद्यमों पर फोकस रहेगा।’ रेटिंग एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि सरकार ऐसे कदम उठाएगी, जिनका नतीजा जल्दी दिखे। एमएसपी बढ़ाने और कर्जमाफी जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। ऐसा करने पर खर्च बढ़ेगा। सरकार बजट में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को लेकर थोड़ा नरमी बरत सकती है

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