नई दिल्ली । जीएसटी काउंसिल की 25वीं बैठक खत्म होने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने काउंसिल की बैठक में हुए अहम फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे सेक्टर्स को राहत दी गई है जो रोजगार को बढ़ावा देने वाले हैं। आपको बता दें कि जीएसटी काउंसिल की आज हुई बैठक में 29 हैंडीक्राफ्ट आइटम्स पर जीएसटी को हटा दिया गया है। हैंडीक्राफ्ट आइटम्स के साथ कुल 49 वस्तुओँ पर जीएसटी की दर को कम किया गया है। अपनी इस खबर में हम आपको वित्त मंत्री की ओर से कही गईं कई बड़ी बातों के बारे में बता रहे हैं।

1. पेट्रोल-डीजल पर अगली बैठक में चर्चा: वित्त मंत्री ने यह साफ संकेत दिये कि सरकार का प्रयास पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का है। उन्होंने कहा कि आज की बैठक में पेट्रोल और डीजल के मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। लेकिन यह निश्चित है कि अगली बैठक में पेट्रोल-डीजल के साथ साथ उन वस्तुओं पर चर्चा होगी जो जीएसटी के दायरे से बाहर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लक्जरी प्रोडक्ट्स, सिन प्रोडक्ट्स, डी-मैरिट आदि वस्तुओं पर ऊंची दर से टैक्स लगता रहेगा। आपको बता दें कि अगली बैठक 10 दिन बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होनी हैं।

2. कंपोजीशन स्कीम को अच्छा रिस्पॉन्स नहीं: सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कंपोजिशन स्कीम को अपेक्षित रिस्पॉन्स नहीं मिला है। आपको बता दें कि GST में छोटे व्यवसाय जिनका टर्नओवर 20 लाख रुपये (असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में 10 लाख रूपये) तक का है उन्हें जीएसटी का भुगतान करने और रजिस्ट्रेशन लेने की आवश्यकता नहीं है। कंपोजीशन स्कीम की सुविधा सिर्फ व्यापारियों, मैन्यूफैक्चरिंग यूनिटों और रेस्तरां सेवा प्रदाताओं को ही प्राप्त है। इसके तहत पंजीकृत व्यापारियों को अपने टर्नओवर का मात्र एक प्रतिशत और मैन्यूफैक्चरर को दो प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करना होता है। वही रेस्तरां सेवा प्रदान करने वाले व्यवसायियों को इस स्कीम के तहत पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी अदा करना होता है। कंपोजीशन स्कीम में पंजीकृत व्यापारियों को सबसे बड़ी सुविधा यह है कि उन्हें हर माह जीएसटी का रिटर्न दाखिल नहीं करना पड़ता। वे तीन माह में सिर्फ एक बार जीएसटी रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि कंपोजीशन स्कीम के तहत पंजीकृत व्यापारी अंतरराज्यीय बिक्री नहीं कर सकते।

3. दरें घटाने का असर कलेक्शन पर पड़ता है: वित्त मंत्री ने कहा कि वस्तुओं पर टैक्स घटाने का असर जीएसटी कलेक्शन पर पड़ता है। आपको बता दें कि जीएसटी कलेक्शन सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। नवंबर महीने में जीएसटी कल्केशन 5 महीने के निचले स्तर पर 80808 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इससे पहले अक्टूबर में सरकार को जीएसटी संग्रह से कुल 83346 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। यही संग्रह सितंबर में 92150 करोड़ रुपए, अगस्त में 90669 करोड़ रुपए और जुलाई में 94063 करोड़ रुपए रहा था।

4. 15 राज्यों में 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू करेंगे: वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि 16 जनवरी से ई-वे बिल का ट्रायल शुरू हो चुका है और इसकी शुरुआत 15 राज्यों में 1 फरवरी से कर दी जाएगी। आपको बता दें अगर किसी वस्तु का एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर राज्य के भीतर मूवमेंट होता है तो सप्लायर को ई-वे बिल जनरेट करना होगा। अहम बात यह है कि सप्लायर के लिए यह बिल उन वस्तुओं के पारगमन (ट्रांजिट) के लिए भी बनाना जरूरी होगा जो जीएसटी के दायरे में नहीं आती हैं। इस बिल में सप्लायर, ट्रांसपोर्ट और ग्राही (Recipients) की डिटेल दी जाती है। अगर जिस गुड्स का मूवमेंट एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर एक ही राज्य के भीतर हो रहा है और उसकी कीमत 50,000 रुपए से ज्यादा है तो सप्लायर (आपूर्तिकर्ता) को इसकी जानकरी जीएसटीएन पोर्टल में दर्ज करानी होगी।

5. रोजगार बढ़ाने वाले सेक्टर्स को राहत मिली: वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स की दरें उन वस्तुओं पर घटाई गई है जो रोजगार को बढ़ावा देने वाले हैं। देश में रोजगार की स्थिती चिंताजनक है। ऐसे में यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि बजट में भी इसकी झलक देखने को मिल सकती है। बजट में सरकार उन क्षेत्रों को राहत देने का फैसला कर सकती है जो रोजगार के अवसर मुहैया कराने में अहम भूमिका अदा करते हैं।

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