देश की आधी आबादी आयकर विभाग के परमानेंट अकाउंट नंबर यानी पैन के मामले में पुरुषों से बेहद पीछे हैं। विभाग से अब तक जारी पैन में महज एक तिहाई ही महिलाओं ने हासिल किये हैं। पैन हासिल करने वाली बाकी संख्या पुरुषों की है।

आयकर विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 31 मार्च 2017 तक कुल मिलाकर 28.57 करोड़ पैन जारी किए गए। इनमें से 19.45 करोड़ यानी 68 फीसदी से कुछ ज्यादा पुरुषों के नाम रहे, जबकि 9.12 करोड़ यानी करीब 32 फीसदी महिलाओं के नाम। यहां ये भी ध्यान देने की बात है कि देश के कुल 101 अरबपतियों में महज 4 ही महिलाएं हैं।

अक्षर और संख्या को मिलाकर बने पैन में कुल 10 कैरेक्टर होते हैं। ये एक तरह की वित्तीय पहचान है। तमाम तरह के कानूनी वित्तीय लेन-देन में ये पहचान का आधार होता है। मसलन, चाहे बैंक खाता खोलना हो या फिर शेयर बाजार में खरीद-फरोख्त के लिए डिमैट अकाउंट, दोनों ही जगह पर पैन की दरकार होती है। पैन किसी भी उम्र में हासिल किया जा सकता है। यहां तक कि नवजात के नाम भी पैन हासिल किया जा सकता है, हालांकि इसकी ज्यादा उपयोगिता व्यस्क हो जाने पर ही है।

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