अगले वर्ष का आम बजट पेट्रोलियम क्षेत्र में बड़ी कंपनी बनाने की कोशिशों को और परवान चढ़ा सकता है। वैसे तो इस कोशिश की शुरुआत चालू वित्त वर्ष के बजट में हो गई थी और हाल ही में ओएनजीसी और एचपीसीएल के विलय के साथ इसे परवान भी चढ़ा दिया गया है। इससे भारत में भी अब दुनिया की दिग्गज तेल कंपनियों के मुकाबले एक कंपनी स्थापित हो गई है। इस सफलता से उत्साहित वित्त मंत्री अरुण जेटली अगले बजट में सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियों में विलय करने को बढ़ावा देने के लिए कुछ घोषणाएं कर सकते हैं।

आम बजट 2016-17 पेश करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने कहा था, ‘बड़े जोखिम लेने व बड़े निवेश के लिए सरकारी कंपनियों में व्यापक पुनर्गठन की जरूरत है। यह काम तेल व गैस क्षेत्र में संभव है। हम एक समग्र तेल कंपनी बनाने का प्रस्ताव करते हैं।’ इसके कुछ महीने बाद ओएनजीसी और एचपीसीएल के विलय के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी जिसे पिछले हफ्ते ही अंतिम रूप दिया गया है। इससे सरकार के खजाने में 37 हजार करोड़ रुपये की राशि आई है और इससे विनिवेश लक्ष्य भी पूरा हो जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रलय के सूत्रों के मुताबिक पिछले वर्ष भी सरकार ने यह नहीं कहा था कि किन कंपनियों का विलय किया जाएगा। आगे भी सरकार यह कंपनियों पर ही छोड़ देगी लेकिन विलय को सहूलियत देने के लिए कंपनियों को टैक्स छूट देने का विचार है।

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