राजद प्रमुख लालू यादव को चारा घोटाले के तीसरे मामले में सीबीआइ की रांची स्थित विशेष अदालत ने बुधवार को दोषी करार दिया। यह मामला चाईबासा कोषागार से 1992-93 में 33.67 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से संबंधित है। फैसले के बाद लालू के पुत्र तेजस्वी यादव ने भाजपा, आरएसएस और नीतिश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सब लोग जानते हैं कि इन सब ने मिलकर लालू यादव जी के खिलाफ षड्यंत्र रचा है। हम इन सभी फैसलों के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।

सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एसएस प्रसाद की अदालत ने दस जनवरी 2018 को सुनवाई पूरी करते हुए फैसले के लिए तिथि निर्धारित की थी। चाईबासा कोषागार से 33 करोड़, 67 लाख 534 रुपये की अवैध निकासी को लेकर चारा घोटाला कांड संख्या आरसी 68ए/96 के तहत प्राथमिकी दर्ज है। निकासी 1992 से 93 के बीच हुई थी। राजनीतिक नेता, पशुपालन अधिकारी व आइएएस अधिकारियों की मिलीभगत से 67 जाली आवंटन पत्र पर 33 करोड़ 67 लाख 534 रुपये की निकासी कर ली। जबकि मूल आवंटन 7.10 लाख रुपये ही था। वरीय विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह ने सीबीआइ की ओर पक्ष रखा। उन्होंने सीबीआइ की ओर से 203 लोगों की गवाही न्यायालय में दर्ज कराई। मामले की सुनवाई में बचाव की ओर से 23 गवाहों को प्रस्तुत किया गया। इसमें लालू प्रसाद की ओर से 17 लोगों की गवाही दर्ज कराई गई। इसके अलावा दस्तावेजों को प्रस्तुत किया गया।

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