गाहे-बगाहे फंसे कर्ज यानी एनपीए के बहाने बैंकों की खराब सेहत का हवाला देकर लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले बैंक प्रमुखों पर वित्त मंत्रालय की पैनी नजर है। मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय बहुत जल्द भारतीय रिजर्व बैंक की समयोचित सुधार योजना (पीसीए) के तहत 12 प्रमुख बैंकों के प्रमुखों के प्रदर्शन की समीक्षा करने वाला है।

प्रदर्शन के कुछ महत्वपूर्ण मानकों पर पिछड़ते रहने की वजह से अब तक़ एक दर्जन प्रमुख सरकारी बैंकों पर रिजर्व बैंक की पहले से ही नजर है। इन मानकों में अप्रत्याशित उच्च एनपीए, पूंजी का निम्न स्तर और निवेश पर कम रिटर्न जैसे मानक शामिल हैं। सूत्र के अनुसार, इस तरह के सभी बैंक के प्रमुखों समेत शीर्ष अधिकारियों के प्रदर्शन की बहुत जल्द समीक्षा की जाएगी। सरकार ने इन बैंकों को समय-समय पर पर्याप्त पूंजीगत सहायता दी है। अब एनपीए के मोर्चे पर खुद को साबित करने की जिम्मेदारी इन बैंकों की है। अगर इन बैंकों ने बेहतर प्रदर्शन किया, तो उन्हें पुरस्कार से भी नवाजा जा सकता है।

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