वित्त मंत्री अरुण जेटली आज लोकसभा में मोदी सरकार का लगातार पांचवां बजट पेश कर रहे हैं। उनकी कोशिश अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने और अगले आम चुनाव से पहले जनता की उम्मीदों को साधने की है। आयकर और कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की बाट जोह रहे मध्यम वर्ग व उद्योग जगत को राहत देने के साथ-साथ वित्त मंत्री किसानों के आंसू पोछने के लिए खजाना खोल सकते हैं। साथ ही राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए विनिवेश से अधिकाधिक राशि जुटाने का लक्ष्य तय कर सकते हैं।

जेटली के समक्ष राजकोषीय अनुशासन और लोकलुभावन उम्मीदों के बीच संतुलन साधने की कठिन चुनौती होगी। साथ ही अधूरे वादों को पूरा करने का दबाव भी होगा। ये कारक आम बजट 2018-19 के बजटीय आवंटन और कर प्रस्तावों का स्वरूप तय करेंगे। इस बात के आसार कम ही हैं कि वित्त मंत्री राजकोषीय घाटे के इस साल के लक्ष्य 3.2 फीसद में कोई बदलाव करेंगे। ज्यादा संभावना इस बात की है कि इसे मौजूदा स्तर पर बनाए रखा जाएगा। पड़ोसी देशों के साथ बढ़ रहे तनाव को देखते हुए यह लगभग तय है कि सैन्य आधुनिकीकरण के लिए फंड में कोई कमी नहीं की जाएगी। सीमा के राज्यों में ढांचागत सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए भी इस बजट में कुछ खास घोषणाएं हो सकती हैं।

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